Introduction C Programming in Hindi tutorials

Introduction c प्रोग्रामिंग हिंदी -  आज के इस टुटोरिअल में हम c प्रोग्रामिंग के introduction और history के बारे मे पढ़ेंगे | 

Introduction C Programming Hindi tutorials

C एक जनरल programming लैंग्वेज है यह, एक structure लेवल और और high लेवल की programming लैंग्वेज है | इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का निर्माण unix ऑपरेटिंग सिस्टम को डिज़ाइन करने के लिए बनाया गया था| 

c प्रोग्रामिंग से पहले BCPL प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का निर्माण किया गया था जिसको मार्टिन रिचिर ने बनाया था इसके बाद BCPL से B लैंग्वेज को बनाया गया जिसको कैन थॉम्पसन ने बनाया था और 1970 के बाद इसके कई नए नए versions को बनाया गया जिनके नए नए नाम रखे गये. 

वैसे तो c प्रोग्रामिंग को 1970 मे ही बना लिया गया था और उसके कई versions भी आ चुके थे . लेकिन 1983 मे c प्रोग्रामिंग को define करने के लिए एक अमेरिकन नेशनल इंस्टिट्यूट का गठन किया गया . 


इस संगठन का काम c प्रोग्रामिंग को define करना ही था और अंत मे  December 1989 में c प्रोग्रामिंग को मुख्य तोर पे डिफाइन किया गया  इसके बाद समय समय पर c प्रोग्रामिंग के और भी नए नए versions आते गए और c को और भी बेहतर बनाने के लिए और भी नए नए बदलाव किये गए |  

c versions lists  
  
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c programming introduction 

Structure programming language in Hindi

एक structure programming language वो language होती है जो की एक fixed structure को follow करती है जैसे की c एक structure programming language है इसलिए c एक fixed structure को  follow करती है 
और उस structure को follow करते हुए हमें c मे प्रोग्राम को लिखना पड़ता है | 


The middle-level programming language in Hindi

Middle-level language वो language होती है  जिसमे control और flexibility तो low-level programming languageजैसी हो लेकिन वो high-level programming language के features को भी इस्तेमाल करती हो 
जैसे की c एक Middle-level programming language है तो यह basic functions और elements जैसे की bits, bytes और address का इस्तेमाल करती है तो दूसरी तरफ different types के variables का भी इस्तेमाल करती है जो की एक high-level programming language का feature है


Portability of language in Hindi

किसी भी programming language के portable होने से यह मतलब है की उस programming language में लिखे हुए program को अलग अलग system में चलाने के लिए आसानी से बदला जा सकता है 

वैसे ही c एक portable language है इसमें लिखे हुए program को आसानी से बदल के अलग अलग systems में run कर सकते है  

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